कुरान - 27:38 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
قَالَ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ أَيُّكُمۡ يَأۡتِينِي بِعَرۡشِهَا قَبۡلَ أَن يَأۡتُونِي مُسۡلِمِينَ

Transliteration: (Qaala yaaa aiyuhal mala'u aiyukum yaateenee bi'arshihaa qabla ai yaatoonee muslimeen)

(सुलैमान ने) फ़रमाया, 'ऐ दरबारियो! तुममें से कौन है जो उसका तख़्त मेरे पास ले आए, इससे पहले कि वे फ़रमांबरदार (मुस्लिम) होकर मेरे पास हाज़िर हों [74]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 38

"(सुलैमान ने) फ़रमाया, 'ऐ दरबारियो! तुममें से कौन है जो उसका तख़्त मेरे पास ले आए, इससे पहले कि वे मुस्लिम होकर हाज़िर हों [74]?'"

[74] मल्लिका के आने से पहले तख़्त मंगवाने की हिकमत

जब क़ासिद ने लौटकर मल्लिका को सारा माजरा सुनाया, तो बिलक़ीस ने अपनी बारह हज़ार सरदारों की फ़ौज के साथ हज़रत सुलैमान की ख़िदमत में हाज़िर होने का सफ़र शुरू कर दिया। हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम को जब यह ख़बर मिली तो आपने अपने दरबारियों से फ़रमाया कि उनके इस्लाम लाने से पहले कौन उसका अज़ीम तख़्त यहां ला सकता है? (क्योंकि इस्लाम लाने के बाद किसी का माल बिना इजाज़त लाना जाइज़ न रहता, और यह मोजिज़ा देखकर बिलक़ीस का ईमान और पुख़्ता हो जाए)।

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