कुरान - 27:37 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
ٱرۡجِعۡ إِلَيۡهِمۡ فَلَنَأۡتِيَنَّهُم بِجُنُودٖ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخۡرِجَنَّهُم مِّنۡهَآ أَذِلَّةٗ وَهُمۡ صَٰغِرُونَ

Transliteration: (Irji' ilaihim falanaatiyan nahum bijunoodil laa qibala lahum bihaa wa lanukhri jannahum minhaaa azillatanw wa hum saaghiroon)

उनके पास वापस लौट जाओ [72]! हम ज़रूर उनके मुक़ाबले में ऐसे लश्कर लाएंगे जिनका वे सामना न कर सकेंगे, और हम ज़रूर उन्हें वहाँ से ज़लील व ख़्वार करके निकाल बाहर करेंगे [73]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 37

"उनके पास वापस लौट जाओ [72]! हम ऐसे लश्कर लाएंगे जिनका वे सामना न कर सकेंगे, और उन्हें ज़लील करके निकाल बाहर करेंगे [73]!'"

[72] तोहफ़ा वापस करने का हुक्म

हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ने मल्लिका का तमाम माल व तोहफ़ा वापस लौटाने का हुक्म फ़रमाया और क़ासिद से कहा कि अपनी मल्लिका से कह दो कि हमारे नज़दीक सिर्फ़ इस्लाम और ईमान मक़बूल है, माल नहीं।

[73] लश्कर-ए-जुर्रार की चेतावनी

फ़रमाया कि अगर वे ईमान न लाए और हाज़िर न हुए, तो हम इंसानों, जिन्नों और परिंदों का ऐसा अज़ीम लश्कर लेकर आएंगे जिसके मुक़ाबले की ताक़त सारी दुनिया में किसी के पास नहीं, और उनकी सरकशी का ख़ात्मा करके उन्हें रुसवा कर दिया जाएगा।

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