कुरान - 27:39 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
قَالَ عِفۡرِيتٞ مِّنَ ٱلۡجِنِّ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبۡلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَۖ وَإِنِّي عَلَيۡهِ لَقَوِيٌّ أَمِينٞ

Transliteration: (Qaala 'ifreetum minal jinni ana aateeka bihee qabla an taqooma mim maqaamika wa innee 'alaihi laqawiyyun ameen)

जिन्नों में से एक क़वी हैकल (ताक़तवर) देव (इफ़्रीत) ने कहा [75], 'मैं वह तख़्त आपके पास ले आऊंगा इससे पहले कि आप अपनी मजलिस (दरबार) से उठें [76]; और बेशक मैं इस पर पूरी क़ुव्वत रखने वाला, अमानतदार हूँ [77]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 39

"जिन्नों में से एक ताक़तवर देव ने कहा [75], 'मैं वह तख़्त आपके पास ले आऊंगा इससे पहले कि आप दरबार से उठें [76]; और मैं पूरी क़ुव्वत रखने वाला, अमानतदार हूँ [77]।'"

[75] 'इफ़्रीतुम मिनल जिन्न' (सरकश व ताक़तवर जिन्न)

उस जिन्न का नाम 'ज़कवान' या 'दुलहा' था जो जिन्नात के बड़े पहलवानों और सरदारों में शुमार होता था।

[76] दोपहर तक तख़्त लाने की पेशकश

हज़रत सुलैमान का दरबार सुबह से दोपहर (निस्फ़ुन्नहार) तक लगता था। उस जिन्न ने अर्ज़ किया कि यमन (सबा) से बैतुल मुक़द्दस तक का फ़ासला लगभग पंद्रह सौ मील है; मैं आपके दरबार बरख़ास्त होने से पहले तीन-चार घंटे में वह अस्सी गज़ का भारी तख़्त उठाकर यहां ले आऊंगा।

[77] अमानत और क़ुव्वत

उसने भरोसा दिलाया कि मैं इतना ताक़तवर हूँ कि आसानी से उठा लाऊंगा और अमानतदार ऐसा हूँ कि उसके किसी सोने, जवाहरात या हीरे में कोई ख़यानत न करूँगा।

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