Transliteration: (Qaala 'ifreetum minal jinni ana aateeka bihee qabla an taqooma mim maqaamika wa innee 'alaihi laqawiyyun ameen)
"जिन्नों में से एक ताक़तवर देव ने कहा [75], 'मैं वह तख़्त आपके पास ले आऊंगा इससे पहले कि आप दरबार से उठें [76]; और मैं पूरी क़ुव्वत रखने वाला, अमानतदार हूँ [77]।'"
उस जिन्न का नाम 'ज़कवान' या 'दुलहा' था जो जिन्नात के बड़े पहलवानों और सरदारों में शुमार होता था।
हज़रत सुलैमान का दरबार सुबह से दोपहर (निस्फ़ुन्नहार) तक लगता था। उस जिन्न ने अर्ज़ किया कि यमन (सबा) से बैतुल मुक़द्दस तक का फ़ासला लगभग पंद्रह सौ मील है; मैं आपके दरबार बरख़ास्त होने से पहले तीन-चार घंटे में वह अस्सी गज़ का भारी तख़्त उठाकर यहां ले आऊंगा।
उसने भरोसा दिलाया कि मैं इतना ताक़तवर हूँ कि आसानी से उठा लाऊंगा और अमानतदार ऐसा हूँ कि उसके किसी सोने, जवाहरात या हीरे में कोई ख़यानत न करूँगा।
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