कुरान - 27:43 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعۡبُدُ مِن دُونِ ٱللَّهِۖ إِنَّهَا كَانَتۡ مِن قَوۡمٖ كَٰفِرِينَ

Transliteration: (Wa saddahaa maa kaanat ta'budu min doonil laahi innahaa kaanat min qawmin kaafireen)

और उसे (ईमान से) उस चीज़ ने रोक रखा था जिसकी वह अल्लाह के सिवा इबादत करती थी [85]; बेशक वह काफ़िर लोगों में से थी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 43

"और उसे उस चीज़ ने रोक रखा था जिसकी वह अल्लाह के सिवा इबादत करती थी [85]; बेशक वह काफ़िर लोगों में से थी।"

[85] ख़ानदानी माहौल और सूरज की पूजा की रुकावट

बिलक़ीस फ़ितरतन अक़्लमन्द थी, मगर उसके आबाओ-अजदाद और क़ौम का मुशरिक माहौल और सूरज की पूजा उसके दिल पर हिदायत का पर्दा बनी हुई थी जिसे हज़रत सुलैमान की दावत ने चाक कर दिया।

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