कुरान - 27:45 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمۡ صَٰلِحًا أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ فَإِذَا هُمۡ فَرِيقَانِ يَخۡتَصِمُونَ

Transliteration: (Wa laqad arsalnaaa ilaa Samooda akhaahum Saalihan ani'budul laaha fa izaa hum fareeqaani yakhtasimoon)

और बेशक हमने समूद की तरफ़ उनके भाई सालेह को भेजा कि 'अल्लाह की इबादत करो,' तो अचानक वे दो गिरोह बनकर आपस में झगड़ने लगे [90]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 45

"और हमने समूद की तरफ़ उनके भाई सालेह को भेजा कि 'अल्लाह की इबादत करो,' तो वे दो गिरोह बनकर झगड़ने लगे [90]।"

[90] क़ौम-ए-समूद में तौहीद की दावत पर इख़्तिलाफ़

हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को बुतपरस्ती छोड़ कर सिर्फ़ एक अल्लाह की इबादत की दावत दी। इस पर क़ौम दो धड़ों में बंट गई: एक मोमिनों की जमाअत जो हज़रत सालेह पर ईमान लाई, और दूसरा काफ़िर सरदारों का गिरोह जो दुश्मनी पर उतर आया।

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