कुरान - 27:46 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
قَالَ يَٰقَوۡمِ لِمَ تَسۡتَعۡجِلُونَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبۡلَ ٱلۡحَسَنَةِۖ لَوۡلَا تَسۡتَغۡفِرُونَ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ

Transliteration: (Qaala yaa qawmi lima tasta'jiloona bissaiyi'ati qablal hasanati law laa tas taghfiroonal laaha la'allakum turhamoon)

(सालेह ने) फ़रमाया, 'ऐ मेरी क़ौम! तुम भलाई (रहमत) से पहले बुराई (अज़ाब) की जल्दी क्यों मचाते हो? तुम अल्लाह से मग़फ़िरत क्यों नहीं मांगते ताकि तुम पर रहम किया जाए?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 46

"(सालेह ने) फ़रमाया, 'ऐ मेरी क़ौम! तुम भलाई से पहले बुराई की जल्दी क्यों मचाते हो? अल्लाह से मग़फ़िरत क्यों नहीं मांगते ताकि तुम पर रहम किया जाए?'"

हज़रत सालेह ने फ़रमाया कि तुम ईमान और तौबा के ज़रिये अल्लाह की रहमत मांगने के बजाए गुस्ताख़ी से अज़ाब का मुतालबा क्यों करते हो? अगर तुम तौबा कर लो तो अल्लाह तुम्हें बख़्श देगा।

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