कुरान - 27:48 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
وَكَانَ فِي ٱلۡمَدِينَةِ تِسۡعَةُ رَهۡطٖ يُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا يُصۡلِحُونَ

Transliteration: (Wa kaana fil madeenati tis'atu rahtiny yufsidoona fil ardi wa laa yuslihoon)

और उस शहर में नौ आदमी (सरगना) थे [97] जो ज़मीन में फ़साद फैलाते थे और कोई इस्लाह (सुधार) नहीं करते थे [98]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 48

"और उस शहर में नौ आदमी थे [97] जो ज़मीन में फ़साद फैलाते थे और कोई इस्लाह नहीं करते थे [98];"

[97] क़ौम-ए-समूद के नौ मुफ़्सिद सरदार

मदाइन-ए-सालेह (हिज्र) के शहर में नौ बड़े शरीर और बदबख़्त सरदार थे जिनका सरगना 'क़ुदार बिन सालिफ़' था।

[98] फ़साद-अंगेज़ी और इस्लाह से दूरी

ये नौ बदमाश हर वक़्त क़त्ल, ग़ारतगरी, डाकेबाज़ी और गुनाहों में पेश-पेश रहते थे और उनकी तबीयत में इस्लाह व भलाई का कोई माद्दा न था।

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