कुरान - 27:49 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
قَالُواْ تَقَاسَمُواْ بِٱللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُۥ وَأَهۡلَهُۥ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِۦ مَا شَهِدۡنَا مَهۡلِكَ أَهۡلِهِۦ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ

Transliteration: (Qaaloo taqaasamoo billaahi lanubaiyitannahoo wa ahlahoo summaa lanaqoolana liwaliy yihee maa shahidnaa mahlika ahlihee wa innaa lasaadiqoon)

उन्होंने कहा, 'आपस में अल्लाह की क़सम खाओ कि हम सालेह और उसके घर वालों पर ज़रूर रात में छापा मारेंगे [99], फिर उसके वारिस से कह देंगे [100] कि हम उसके अहलो-अयाल की हलाकत के वक़्त मौजूद ही न थे, और बेशक हम सच्चे हैं [101]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 49

"उन्होंने कहा, 'क़सम खाओ कि हम सालेह और उसके घर वालों पर रात में छापा मारेंगे [99], फिर वारिस से कह देंगे [100] कि हम मौजूद न थे, और हम सच्चे हैं [101]।'"

[99] शब-ख़ूं (रात में क़त्ल करने की साज़िश)

उन नौ बदमाशों ने मश्विरा किया कि सालेह ने कहा है कि तीन दिन बाद अज़ाब आएगा, लिहाज़ा इससे पहले कि अज़ाब आए हम रात के अंधेरे में छुप कर सालेह और उनके तमाम अहल-ओ-अयाल को क़त्ल कर दें।

[100] वारिसों को धोखे में रखना

उन्होंने तय किया कि क़त्ल करने के बाद जब सालेह के ख़ानदान वाले ख़ून-बहा मांगेंगे तो हम साफ़ मुकर जाएंगे कि हमें कुछ मालूम नहीं।

[101] झूठी क़समें और मक्कारी

वे अपने इस नापाक जुर्म पर झूठी क़समें खाने और ख़ुद को बेगुनाह साबित करने का पूरा मन्सूबाह बना चुके थे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now