कुरान - 27:51 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ مَكۡرِهِمۡ أَنَّا دَمَّرۡنَٰهُمۡ وَقَوۡمَهُمۡ أَجۡمَعِينَ

Transliteration: (Fanzur kaifa kaana 'aaqibatu makrihim annaa dammar naahum wa qawmahum ajma'een)

पस देख लो कि उनकी चालबाज़ी का अंजाम कैसा हुआ, कि हमने उन्हें [103] और उनकी पूरी क़ौम को तबाह व बर्बाद कर दिया [104]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 51

"पस देख लो उनकी चालबाज़ी का अंजाम, कि हमने उन्हें [103] और उनकी पूरी क़ौम को तबाह कर दिया [104]!"

[103] साज़िशियों का अज़ाब

पहले उन नौ साज़िशियों को चट्टानों तले कुचला गया।

[104] पूरी क़ौम की मुकम्मल हलाकत

फिर चौथे दिन सुबह के वक़्त आसमान से हज़रत जिब्रील की हौलनाक चीख़ और ज़मीन के ज़लज़ले से पूरी क़ौम-ए-समूद को नेस्त व नाबूद कर दिया गया।

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