कुरान - 27:52 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
فَتِلۡكَ بُيُوتُهُمۡ خَاوِيَةَۢ بِمَا ظَلَمُوٓاْۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Fatilka buyootuhum khaa wiyatam bimaa zalamoo; inna fee zaalika la Aayatal liqaw miny-ya'lamoon)

तो ये हैं उनके घर जो उनके ज़ुल्म के सबब वीरान पड़े हैं [105]; बेशक इसमें इल्म रखने वाले लोगों के लिए बड़ी निशानी है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 52

"तो ये हैं उनके घर जो ज़ुल्म के सबब वीरान पड़े हैं [105]; बेशक इसमें इल्म वालों के लिए बड़ी निशानी है।"

[105] खंडहर बने महल और इबरतनाक ख़ामोशी

पहाड़ों को तराश कर बनाए गए उनके मज़बूत महल आज भी हिज्र (मदाइन सालेह) में वीरान और खंडहर बने खड़े हैं जो गवाही दे रहे हैं कि अल्लाह के नबियों की नाफ़रमानी का अंजाम सिर्फ़ तबाही है।

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