कुरान - 27:54 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
وَلُوطًا إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦٓ أَتَأۡتُونَ ٱلۡفَٰحِشَةَ وَأَنتُمۡ تُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Wa lootan iz qaala liqawmiheee ataatoonal faa hishata wa antum tubsiroon)

और लूत को (याद करो), जब उन्होंने अपनी क़ौम से फ़रमाया [107], 'क्या तुम खुली आंखों बेहयाई (बदकारी) करते हो? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 54

"और लूत को (याद करो), जब अपनी क़ौम से फ़रमाया [107], 'क्या तुम खुली आंखों बेहयाई करते हो?"

[107] क़ौम-ए-लूत की खुलेआम बेहयाई

हज़रत लूत अलैहिस्सलाम ने अपनी बदकार क़ौम को मलामत फ़रमाई कि तुम अपनी मजलिसों और महफ़िलों में खुलेआम एक दूसरे के सामने यह शर्मनाक काम (लवात़त) करते हो और तुम्हें ज़रा भी हया नहीं आती।

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