कुरान - 27:56 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
۞فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ أَخۡرِجُوٓاْ ءَالَ لُوطٖ مِّن قَرۡيَتِكُمۡۖ إِنَّهُمۡ أُنَاسٞ يَتَطَهَّرُونَ

Transliteration: (Famaa kaana jawaaba qawmiheee illaaa an qaalooo akhrijooo aalaa Lootim min qaryatikum innahum unaasuny yatatahharoon)

तो उनकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा, 'निकाल बाहर करो लूत के घर वालों को अपनी बस्ती से; बेशक ये ऐसे लोग हैं जो पाकबाज़ बनना चाहते हैं [109]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 56

"तो क़ौम का जवाब यह था कि 'निकाल बाहर करो लूत के घर वालों को अपनी बस्ती से; ये ऐसे लोग हैं जो पाकबाज़ बनना चाहते हैं [109]!'"

[109] पाकीज़गी का मज़ाक़ उड़ाना

बदकारों ने कहा कि लूत और उनके साथियों को शहर से निकाल दो क्योंकि ये गुनाहों से बचते हैं और पाकबाज़ बनते हैं। जब समाज इतना बिगड़ जाए कि नेकी जुर्म बन जाए, तो उस पर अल्लाह का अज़ाब यक़ीनी हो जाता है।

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