कुरान - 27:58 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرٗاۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلۡمُنذَرِينَ

Transliteration: (Wa amtarnaa 'alaihimm mataran fasaaa'a matarul munzareen (section 4))

और हमने उन पर एक (भयानक) बारिश बरसाई; तो डराए गए लोगों की कैसी बुरी बारिश थी! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 58

"और हमने उन पर पत्थरों की बारिश बरसाई; तो डराए गए लोगों की कैसी बुरी बारिश थी!"

बस्ती को उलटने के बाद उन पर आसमान से पकी हुई मिट्टी के पत्थरों (सिज्जील) की बारिश बरसाई गई जिससे तमाम नाफ़रमान टुकड़े-टुकड़े होकर हलाक हो गए।

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