कुरान - 27:60 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
أَمَّنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَنۢبَتۡنَا بِهِۦ حَدَآئِقَ ذَاتَ بَهۡجَةٖ مَّا كَانَ لَكُمۡ أَن تُنۢبِتُواْ شَجَرَهَآۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ بَلۡ هُمۡ قَوۡمٞ يَعۡدِلُونَ

Transliteration: (Amman khalaqas samaawaati wal arda wa anzala lakum minas samaaa'i maaa'an fa anbatnaa bihee hadaaa'iqa zaata bahjah; maa kaana lakum an tunbitoo shajarahaa; 'a-ilaahun ma'al laah; bal hum qawmuny ya'diloon)

भला वह कौन है जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया [113], और तुम्हारे लिए आसमान से पानी बरसाया [114], फिर हमने उसके ज़रिये पुर-रौनक़ (ख़ूबसूरत) बाग़ात उगाए; तुम्हारे बस में न था कि तुम उनके दरख़्तों को उगा सकते [115]! क्या अल्लाह के साथ कोई और माबूद भी है? बल्कि ये वे लोग हैं जो (सीधी राह से) हट रहे हैं [116]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 60

"भला वह कौन है जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया [113], आसमान से पानी बरसाया [114], फिर ख़ूबसूरत बाग़ात उगाए; तुम दरख़्त नहीं उगा सकते थे [115]! क्या अल्लाह के साथ कोई माबूद है? बल्कि ये राह से हट रहे हैं [116]।"

[113] ख़ालिक़-ए-कायनात

अल्लाह तआला ही आसमानों और ज़मीन और सारी कायनात का तन्हा ख़ालिक़ व मुदब्बिर है।

[114] रहमत की बारिश

वही आसमान से मीठा पानी बरसाता है जिससे मुरझाया हुआ आलम ज़िन्दा हो जाता है।

[115] रंग-बिरंगे पुर-रौनक़ बाग़ात

अल्लाह तआला ने एक ही मिट्टी और एक ही पानी से तरह-तरह के मीठे फल, ख़ुशबूदार फूल और घने दरख़्त पैदा किए। किसी इंसान की ताक़त नहीं कि एक सूखा बीज डालकर उसमें से दरख़्त निकाल सके।

[116] अद्ल से इनहिराफ़

इन तमाम कुदरतों को देखने के बावजूद जो लोग बुतों को ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं, वे इंसाफ़ और अक़्ल के रास्ते से भटके हुए हैं।

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