Transliteration: (Amman khalaqas samaawaati wal arda wa anzala lakum minas samaaa'i maaa'an fa anbatnaa bihee hadaaa'iqa zaata bahjah; maa kaana lakum an tunbitoo shajarahaa; 'a-ilaahun ma'al laah; bal hum qawmuny ya'diloon)
"भला वह कौन है जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया [113], आसमान से पानी बरसाया [114], फिर ख़ूबसूरत बाग़ात उगाए; तुम दरख़्त नहीं उगा सकते थे [115]! क्या अल्लाह के साथ कोई माबूद है? बल्कि ये राह से हट रहे हैं [116]।"
अल्लाह तआला ही आसमानों और ज़मीन और सारी कायनात का तन्हा ख़ालिक़ व मुदब्बिर है।
वही आसमान से मीठा पानी बरसाता है जिससे मुरझाया हुआ आलम ज़िन्दा हो जाता है।
अल्लाह तआला ने एक ही मिट्टी और एक ही पानी से तरह-तरह के मीठे फल, ख़ुशबूदार फूल और घने दरख़्त पैदा किए। किसी इंसान की ताक़त नहीं कि एक सूखा बीज डालकर उसमें से दरख़्त निकाल सके।
इन तमाम कुदरतों को देखने के बावजूद जो लोग बुतों को ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं, वे इंसाफ़ और अक़्ल के रास्ते से भटके हुए हैं।
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