कुरान - 27:62 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
أَمَّن يُجِيبُ ٱلۡمُضۡطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكۡشِفُ ٱلسُّوٓءَ وَيَجۡعَلُكُمۡ خُلَفَآءَ ٱلۡأَرۡضِۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ قَلِيلٗا مَّا تَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Ammany-yujeebul mud tarra izaa da'aahu wa yakshifus sooo'a wa yaj'alukum khula faaa'al ardi 'a-ilaahun ma'allah qaleelan maa tazak karoon)

भला वह कौन है जो बेक़रार व लाचार की फ़रियाद सुनता है जब वह उसे पुकारे [121] और उसकी तकलीफ़ दूर फ़रमाता है, और तुम्हें ज़मीन का वारिस (जानशीन) बनाता है [122]? क्या अल्लाह के साथ कोई और माबूद है? तुम बहुत ही कम नसीहत क़बूल करते हो! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 62

"भला वह कौन है जो बेक़रार व लाचार की फ़रियाद सुनता है जब वह उसे पुकारे [121] और उसकी तकलीफ़ दूर फ़रमाता है, और तुम्हें ज़मीन का वारिस (जानशीन) बनाता है [122]? क्या अल्लाह के साथ कोई और माबूद है? तुम बहुत ही कम नसीहत क़बूल करते हो!"

[121] बेक़रार व लाचार की दुआ क़बूल फ़रमाने वाला

इस आयत में वाज़ेह फ़रमाया गया कि सिर्फ़ अल्लाह ही है जो तंगी, मुसीबत और लाचारी के वक़्त बंदे की पुकार सुनता है जब वह ख़ुलूस के साथ उससे दुआ करता है। कोई बुत या झूठा माबूद किसी बेक़रार की तकलीफ़ दूर करने पर क़ादिर नहीं। इंसान जब हर सहारे से नाउम्मीद होकर सिर्फ़ परवरदिगार को पुकारता है तो अल्लाह तआला उसकी मुसीबत को टाल देता है।

[122] ज़मीन पर ख़िलाफ़त व जानशीनी

यानी वही अल्लाह है जो मुसीबतों को दूर करके तुम्हें एक-दूसरे का जानशीन बनाता है, पिछली नस्लों को उठाकर तुम्हें ज़मीन के इख़्तियारात, वसाइल और ज़िम्मेदारियाँ सौंपता है। यह जानशीनी अल्लाह की तरफ़ से एक अज़ीम आज़माइश और नेमत है।

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