कुरान - 27:59 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
قُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ وَسَلَٰمٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ ٱلَّذِينَ ٱصۡطَفَىٰٓۗ ءَآللَّهُ خَيۡرٌ أَمَّا يُشۡرِكُونَ

Transliteration: (Qulil hamdu lillaahi wa salaamun 'alaa 'ibaadihil lazeenas tafaa; aaallaahu khairun ammmaa yushrikoon)

(ऐ नबी!) आप कह दीजिए, 'तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं [111], और सलामती हो उसके उन बंदों पर जिन्हें उसने चुन लिया है [112]! क्या अल्लाह बेहतर है या वे (माबूद) जिन्हें ये शरीक ठहराते हैं?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 59

"आप कहिए, 'तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं [111], और सलामती हो उसके मुंतख़ब बंदों पर [112]! क्या अल्लाह बेहतर है या वे जिन्हें ये शरीक करते हैं?'"

[111] हम्द-ए-इलाही

अल्लाह तआला ने अपने हबीब ﷺ को हुक्म फ़रमाया कि अल्लाह की हम्द व सना बयान करें जिसने अपने नबियों को फ़तह दी और ज़ालिमों को हलाक किया।

[112] अंबिया और सालेहीन पर सलाम

'इबादिहिल्लज़ी-नस्तफ़ा' से मुराद तमाम अंबियाए किराम और सहाबा व औलियाए इज़ाम हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने दीन के लिए चुन लिया। उन पर हमेशा सलामती हो।

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