कुरान - 27:84 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

84
حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُو قَالَ أَكَذَّبۡتُم بِـَٔايَٰتِي وَلَمۡ تُحِيطُواْ بِهَا عِلۡمًا أَمَّاذَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Hattaaa izaa jaaa'oo qaala akazzabtum bi Aayaatee wa lam tuheetoo bihaa 'ilman ammaazaa kuntum ta'maloon)

यहाँ तक कि जब वे सब आ जाएंगे [153], तो अल्लाह फ़रमाएगा, 'क्या तुमने मेरी आयात को झुठलाया था [154] हालांकि तुम्हारा इल्म उन पर मुहीत न था [155], या तुम क्या करते थे?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 84 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 84

"यहाँ तक कि जब वे सब आ जाएंगे [153], तो अल्लाह फ़रमाएगा, 'क्या तुमने मेरी आयात को झुठलाया था [154] हालांकि तुम्हारा इल्म उन पर मुहीत न था [155], या तुम क्या करते थे?'"

[153] हिसाब की जगह पर हाज़िरी

यानी जब तमाम मुजरिम अल्लाह तआला की बारगाह में हिसाब-किताब के लिए हाज़िर कर दिए जाएंगे।

[154] डांट-डपट और मलामत

यह सवाल मालूमात के लिए नहीं बल्कि सरकशों को शर्मिंदा करने और उन पर हुज्जत तमाम करने के लिए होगा कि तुमने किस जुर्रत से ख़ुदा की निशानियों को झुठलाया!

[155] बिना तहक़ीक़ के झुठलाना

यानी तुमने बिना सोचे-समझे और बिना किसी इल्मी तहक़ीक़ के सिर्फ़ अपनी जिहालत और हठधर्मी से मेरी आयात का इनकार कर दिया। इससे मालूम हुआ कि किसी भी बात की तहक़ीक़ किए बिना उसे झुठलाना बहुत बड़ा जुर्म है।

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