Transliteration: (Hattaaa izaa jaaa'oo qaala akazzabtum bi Aayaatee wa lam tuheetoo bihaa 'ilman ammaazaa kuntum ta'maloon)
"यहाँ तक कि जब वे सब आ जाएंगे [153], तो अल्लाह फ़रमाएगा, 'क्या तुमने मेरी आयात को झुठलाया था [154] हालांकि तुम्हारा इल्म उन पर मुहीत न था [155], या तुम क्या करते थे?'"
यानी जब तमाम मुजरिम अल्लाह तआला की बारगाह में हिसाब-किताब के लिए हाज़िर कर दिए जाएंगे।
यह सवाल मालूमात के लिए नहीं बल्कि सरकशों को शर्मिंदा करने और उन पर हुज्जत तमाम करने के लिए होगा कि तुमने किस जुर्रत से ख़ुदा की निशानियों को झुठलाया!
यानी तुमने बिना सोचे-समझे और बिना किसी इल्मी तहक़ीक़ के सिर्फ़ अपनी जिहालत और हठधर्मी से मेरी आयात का इनकार कर दिया। इससे मालूम हुआ कि किसी भी बात की तहक़ीक़ किए बिना उसे झुठलाना बहुत बड़ा जुर्म है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat