कुरान - 27:85 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
وَوَقَعَ ٱلۡقَوۡلُ عَلَيۡهِم بِمَا ظَلَمُواْ فَهُمۡ لَا يَنطِقُونَ

Transliteration: (Wa waqa'al qawlu 'alaihim bimaa zalamoo fahum laa yantiqoon)

और उनके ज़ुल्म के सबब उन पर बात (अज़ाब का वादा) साबित हो जाएगी [156], पस वे कुछ बोल न सकेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 85

"और उनके ज़ुल्म के सबब उन पर बात (अज़ाब का वादा) साबित हो जाएगी [156], पस वे कुछ बोल न सकेंगे।"

[156] अज़ाब का फ़ैसला और मुजरिमों की ख़ामोशी

यानी जब उनका जुर्म और शिर्क पूरी तरह साबित हो जाएगा तो उन पर अज़ाब का फ़ैसला लागू हो जाएगा। उस वक़्त उनके पास अपने बचाव में पेश करने के लिए कोई उज़्र या बहाना नहीं होगा, और वे हैबत व शर्मिंदगी से बिल्कुल गूंगे और ला-जवाब हो जाएंगे।

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