कुरान - 27:87 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

87
وَيَوۡمَ يُنفَخُ فِي ٱلصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا مَن شَآءَ ٱللَّهُۚ وَكُلٌّ أَتَوۡهُ دَٰخِرِينَ

Transliteration: (Wa Yawma yunfakhu fis Soori fafazi'a man fis samaawaati wa man fil ardi illaa man shaaa'al laah; wa kullun atawhu daakhireen)

और जिस दिन सूर फूंका जाएगा [159], तो जितने आसमानों में हैं और जितने ज़मीन में हैं सब घबरा उठेंगे (दहशतज़दा हो जाएंगे) [160], सिवाय उसके जिसे अल्लाह चाहे [161]; और सब के सब आजिज़ व फ़रमांबरदार होकर उसके हुज़ूर हाज़िर होंगे [162]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 87 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 87

"और जिस दिन सूर फूंका जाएगा [159], तो जितने आसमानों में हैं और जितने ज़मीन में हैं सब घबरा उठेंगे (दहशतज़दा हो जाएंगे) [160], सिवाय उसके जिसे अल्लाह चाहे [161]; और सब के सब आजिज़ व फ़रमांबरदार होकर उसके हुज़ूर हाज़िर होंगे [162]।"

[159] सूर का फूंका जाना

सूर का पहला फूंकना कायनात की फ़ना के लिए होगा जिससे सारी मख़लूक़ हलाक हो जाएगी, और दूसरा फूंकना दोबारा ज़िंदा होने (हश्र) के लिए होगा जिससे सब उठ खड़े होंगे।

[160] आलमगीर दहशत व घबराहट

सूर की हैबतनाक आवाज़ से आसमानों और ज़मीन की तमाम मख़लूक़ात ख़ौफ़ज़दा हो जाएंगी। पहली फूंक पर यह मौत की दहशत होगी, और दूसरी फूंक पर क़ियामत की होलनाकियों का ख़ौफ़ होगा।

[161] मुस्तस्ना (महफ़ूज़) बंदे

इससे मुराद अल्लाह के मुक़र्रब बंदे—अंबिया-ए-किराम, शोहदा, औलिया और ख़ास फ़रिश्ते—हैं जिन्हें अल्लाह तआला उस दिन की दहशत और घबराहट से महफ़ूज़ फ़रमाएगा। जैसा कि फ़रमाया: "बड़ी घबराहट उन्हें रंजीदा न करेगी।"

[162] बारगाह-ए-इलाही में आजिज़ी के साथ हाज़िरी

यानी उस दिन हर शख़्स लाचार व बेबस होकर अल्लाह की अदालत में पेश होगा:

  • बाज़ सज़ा भुगतने के लिए,

  • बाज़ इनाम व इकराम पाने के लिए,

  • बाज़ मग़फ़िरत व बख़्शिश के लिए,

  • और बाज़ शफ़ाअत फ़रमाने और दूसरों की बख़्शिश कराने के लिए।

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