कुरान - 27:88 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

88
وَتَرَى ٱلۡجِبَالَ تَحۡسَبُهَا جَامِدَةٗ وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ ٱلسَّحَابِۚ صُنۡعَ ٱللَّهِ ٱلَّذِيٓ أَتۡقَنَ كُلَّ شَيۡءٍۚ إِنَّهُۥ خَبِيرُۢ بِمَا تَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Wa taral jibaala tahsabuhaa jaamidatanw wa hiya tamurru marras sahaab; sun'al laahil lazeee atqana kulla shai'; innahoo khabeerun bimaa taf'aloon)

और आप पहाड़ों को देखते हैं तो उन्हें जमा हुआ (मुस्तहकम) समझते हैं, हालाँकि वे बादलों की तरह उड़ते फिरेंगे [163]; यह अल्लाह की कारीगरी (सनअत) है जिसने हर चीज़ को हिकमत से मुस्तहकम बनाया; बेशक वह तुम्हारे आमाल से पूरी तरह बा-ख़बर है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 88 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 88

"और आप पहाड़ों को देखते हैं तो उन्हें जमा हुआ (मुस्तहकम) समझते हैं, हालाँकि वे बादलों की तरह उड़ते फिरेंगे [163]; यह अल्लाह की कारीगरी (सनअत) है जिसने हर चीज़ को हिकमत से मुस्तहकम बनाया; बेशक वह तुम्हारे आमाल से पूरी तरह बा-ख़बर है।"

[163] क़ियामत के दिन पहाड़ों का बादलों की तरह चलना

इस आयत में क़ियामत के उस अज़ीम मंज़र का बयान है जहाँ दुनिया के मज़बूत और भारी पहाड़, जो आज अटल नज़र आते हैं, उस दिन रेज़ा-रेज़ा होकर बादलों की तरह हवा में उड़ते फिरेंगे। यह कायनात के इन्क़िलाब और अल्लाह की कामिल कुदरत का इज़हार है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now