Transliteration: (Wa taral jibaala tahsabuhaa jaamidatanw wa hiya tamurru marras sahaab; sun'al laahil lazeee atqana kulla shai'; innahoo khabeerun bimaa taf'aloon)
"और आप पहाड़ों को देखते हैं तो उन्हें जमा हुआ (मुस्तहकम) समझते हैं, हालाँकि वे बादलों की तरह उड़ते फिरेंगे [163]; यह अल्लाह की कारीगरी (सनअत) है जिसने हर चीज़ को हिकमत से मुस्तहकम बनाया; बेशक वह तुम्हारे आमाल से पूरी तरह बा-ख़बर है।"
इस आयत में क़ियामत के उस अज़ीम मंज़र का बयान है जहाँ दुनिया के मज़बूत और भारी पहाड़, जो आज अटल नज़र आते हैं, उस दिन रेज़ा-रेज़ा होकर बादलों की तरह हवा में उड़ते फिरेंगे। यह कायनात के इन्क़िलाब और अल्लाह की कामिल कुदरत का इज़हार है।
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