Transliteration: (Man jaaa'a bil hasanati falahoo khairun minhaa wa hum min faza'iny Yawma'izin aaminoon)
"जो शख़्स नेकी लेकर आएगा [164], उसके लिए उससे बेहतर बदला होगा [165], और वे लोग उस दिन की घबराहट (दहशत) से बिल्कुल महफ़ूज़ होंगे [166]।"
'नेकी लेकर आएगा' से मुराद यह है कि बंदा सिर्फ़ दुनिया में नेकी न करे बल्कि उसे रियाकारी और गुनाहों से बचाकर सलामती के साथ बारगाह-ए-इलाही में पेश करे। इसमें कलिमए तौहीद और इख़्लास बुनियादी शर्त है।
अल्लाह तआला अपने फ़ज़्ल व करम से बंदे के एक अच्छे अमल का बदला दस गुना से लेकर सात सौ गुना या उससे भी ज़्यादा अता फ़रमाएगा, और जन्नत की हमेशा रहने वाली नेमतों से नवाज़ेगा।
इख़्लास के साथ नेकी करने वाले मोमिनीन क़ियामत के दिन की घबराहट, ख़ौफ़ और दहशत से पूरी तरह महफ़ूज़ व मुतमइन रहेंगे।
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