कुरान - 27:90 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَمَن جَآءَ بِٱلسَّيِّئَةِ فَكُبَّتۡ وُجُوهُهُمۡ فِي ٱلنَّارِ هَلۡ تُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Wa man jaaa'a bissai yi'ati fakubbat wujoohuhum fin Naari hal tujzawna illaa maa kuntum ta'maloon)

और जो शख़्स बुराई (शिर्क व गुनाह) लेकर आएगा, तो ऐसे लोग औंधे मुंह आग में झोंक दिए जाएंगे [167]; (उनसे कहा जाएगा) 'तुम्हें उसी का बदला दिया जा रहा है जो तुम करते थे [168]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 90 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 90

"और जो शख़्स बुराई (शिर्क व गुनाह) लेकर आएगा, तो ऐसे लोग औंधे मुंह आग में झोंक दिए जाएंगे [167]; (उनसे कहा जाएगा) 'तुम्हें उसी का बदला दिया जा रहा है जो तुम करते थे [168]।'"

[167] औंधे मुंह आग में गिराया जाना

यहाँ बुराई से मुराद कुफ़्र, शिर्क और कबीरा गुनाह हैं। चेहरा इंसान के जिस्म का सबसे मोअज़्ज़ज़ हिस्सा है; मुजरिमों को चेहरे के बल जहन्नम की आग में झोंका जाना उनकी इंतिहाई ज़िल्लत व रुसवाई की अलामत है।

[168] अद्ल व इंसाफ़ का मुज़ाहरा

अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं फ़रमाता। जो सज़ा मुजरिमों को दी जाएगी वह उनके अपने किए हुए करतूतों और कुफ़्र का ठीक-ठीक बदला होगी।

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