कुरान - 27:92 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

92
وَأَنۡ أَتۡلُوَاْ ٱلۡقُرۡءَانَۖ فَمَنِ ٱهۡتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهۡتَدِي لِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن ضَلَّ فَقُلۡ إِنَّمَآ أَنَا۠ مِنَ ٱلۡمُنذِرِينَ

Transliteration: (Wa an atluwal Qur-aana famanih tadaa fa innamaa yahtadee linafsihee wa man dalla faqul innamaaa ana minal munzireen)

और यह कि मैं क़ुरआन की तिलावत करता रहूँ [172];' पस जो कोई सीधी राह अपनाएगा वह अपने ही भले के लिए राह पाएगा [173], और जो गुमराह हो जाए, तो कह दीजिए कि, 'मैं तो बस डराने (ख़बरदार करने) वालों में से हूँ [174]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 92 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 92

"और यह कि मैं क़ुरआन की तिलावत करता रहूँ [172];' पस जो कोई सीधी राह अपनाएगा वह अपने ही भले के लिए राह पाएगा [173], और जो गुमराह हो जाए, तो कह दीजिए कि, 'मैं तो बस डराने (ख़बरदार करने) वालों में से हूँ [174]।'"

[172] क़ुरआन की तिलावत और तबलीग़

यानी लोगों को अल्लाह का पैग़ाम सुनाने, उन्हें हक़ समझाने और अहकाम सिखाने के लिए क़ुरआन की तिलावत करता रहूँ।

[173] हिदायत का नफ़ा ख़ुद इंसान के लिए

जो शख़्स ईमान व हिदायत की राह अपनाएगा उसका फ़ायदा ख़ुद उसी को पहुंचेगा; अल्लाह तआला किसी के ईमान का मोहताज नहीं और न रसूल ﷺ को इससे कोई ज़ाती फ़ायदा है।

[174] रसूल का काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुंचाना

यानी मेरा काम अल्लाह का हुक्म साफ़-साफ़ पहुंचा देना और नाफ़रमानी के बुरे अंजाम से डराना है; किसी को ज़बरदस्ती मुसलमान बनाना मेरा काम नहीं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now