Transliteration: (Wa an atluwal Qur-aana famanih tadaa fa innamaa yahtadee linafsihee wa man dalla faqul innamaaa ana minal munzireen)
"और यह कि मैं क़ुरआन की तिलावत करता रहूँ [172];' पस जो कोई सीधी राह अपनाएगा वह अपने ही भले के लिए राह पाएगा [173], और जो गुमराह हो जाए, तो कह दीजिए कि, 'मैं तो बस डराने (ख़बरदार करने) वालों में से हूँ [174]।'"
यानी लोगों को अल्लाह का पैग़ाम सुनाने, उन्हें हक़ समझाने और अहकाम सिखाने के लिए क़ुरआन की तिलावत करता रहूँ।
जो शख़्स ईमान व हिदायत की राह अपनाएगा उसका फ़ायदा ख़ुद उसी को पहुंचेगा; अल्लाह तआला किसी के ईमान का मोहताज नहीं और न रसूल ﷺ को इससे कोई ज़ाती फ़ायदा है।
यानी मेरा काम अल्लाह का हुक्म साफ़-साफ़ पहुंचा देना और नाफ़रमानी के बुरे अंजाम से डराना है; किसी को ज़बरदस्ती मुसलमान बनाना मेरा काम नहीं।
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