कुरान - 27:91 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

91
إِنَّمَآ أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ رَبَّ هَٰذِهِ ٱلۡبَلۡدَةِ ٱلَّذِي حَرَّمَهَا وَلَهُۥ كُلُّ شَيۡءٖۖ وَأُمِرۡتُ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ

Transliteration: (Innamaaa umirtu an a'buda Rabba haazihil baldatil lazee harramahaa wa lahoo kullu shai'inw wa umirtu an akoona minal muslimeen)

(ऐ नबी! कह दीजिए) 'मुझे तो बस यही हुक्म दिया गया है कि मैं इस शहर (मक्का) के रब की इबादत करूँ [169] जिसने इसे हुरमत (अदब व एहतराम) वाला बनाया है [170] और उसी का सब कुछ है; और मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं फ़रमांबरदारों (मुसलमानों) में से रहूँ [171]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 91 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 91

"(ऐ नबी! कह दीजिए) 'मुझे तो बस यही हुक्म दिया गया है कि मैं इस शहर (मक्का) के रब की इबादत करूँ [169] जिसने इसे हुरमत (अदब व एहतराम) वाला बनाया है [170] और उसी का सब कुछ है; और मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं फ़रमांबरदारों (मुसलमानों) में से रहूँ [171];"

[169] सिर्फ़ एक रब की इबादत का हुक्म

हुज़ूर अकरम ﷺ ने ऐलान फ़रमाया कि मेरा मअबूद सिर्फ़ वही वाहिद परवरदिगार है जो मक्का मुकर्रमा का हक़ीक़ी मालिक है, तमाम झूठे माबूद और बुत बातिल हैं।

[170] मक्का मुकर्रमा की हुरमत व अज़्मत

अल्लाह तआला ने इस मुक़द्दस शहर को हुरमत, अमन और अज़्मत वाला बनाया है जहाँ ख़ूंरेज़ी और शिकार तक मना है। यह कुरैश को याद दिलाना है कि जिस शहर के एहतराम पर उन्हें नाज़ है उसकी बरकत सिर्फ़ अल्लाह की अता कर्दा है।

[171] फ़रमांबरदारी का ऐलान

यानी मैं अल्लाह के अहकाम के आगे पूरी तरह सर-ब-सुजूद हूँ और उसकी इताअत करने वाले मोमिनीन की जमाअत में शामिल हूँ।

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