Transliteration: (Innamaaa umirtu an a'buda Rabba haazihil baldatil lazee harramahaa wa lahoo kullu shai'inw wa umirtu an akoona minal muslimeen)
"(ऐ नबी! कह दीजिए) 'मुझे तो बस यही हुक्म दिया गया है कि मैं इस शहर (मक्का) के रब की इबादत करूँ [169] जिसने इसे हुरमत (अदब व एहतराम) वाला बनाया है [170] और उसी का सब कुछ है; और मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं फ़रमांबरदारों (मुसलमानों) में से रहूँ [171];"
हुज़ूर अकरम ﷺ ने ऐलान फ़रमाया कि मेरा मअबूद सिर्फ़ वही वाहिद परवरदिगार है जो मक्का मुकर्रमा का हक़ीक़ी मालिक है, तमाम झूठे माबूद और बुत बातिल हैं।
अल्लाह तआला ने इस मुक़द्दस शहर को हुरमत, अमन और अज़्मत वाला बनाया है जहाँ ख़ूंरेज़ी और शिकार तक मना है। यह कुरैश को याद दिलाना है कि जिस शहर के एहतराम पर उन्हें नाज़ है उसकी बरकत सिर्फ़ अल्लाह की अता कर्दा है।
यानी मैं अल्लाह के अहकाम के आगे पूरी तरह सर-ब-सुजूद हूँ और उसकी इताअत करने वाले मोमिनीन की जमाअत में शामिल हूँ।
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