Transliteration: (Alam yaraw annaa ja'alnal laila li yaskunoo feehi wannahaara mubsiraa; inna fee zaalika la Aayaatil liqaw miny-yu'minoon)
"क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने रात बनाई ताकि वे उसमें सुकून हासिल करें और दिन को रौशन बनाया [157]? बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं [158]।"
अल्लाह तआला ने रात को अंधेरी बनाया ताकि इंसान दिन भर की मेहनत के बाद सुकून और आराम पा सके, और दिन को रौशन बनाया ताकि वह अपनी रोज़ी तलाश कर सके और ज़िंदगी के काम अंजाम दे सके। यह हिकमत-ए-इलाहिया का कितना अज़ीम शाहकार है।
दिन और रात का यह मुनज़्ज़म निज़ाम अल्लाह तआला की वहदानियत और कुदरत की खुली दलील है, मगर इससे वही लोग इबरत व ईमान हासिल करते हैं जो ग़ौर-ओ-फ़िक्र की सलाहियत रखते हैं।
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