कुरान - 27:86 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

86
أَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا جَعَلۡنَا ٱلَّيۡلَ لِيَسۡكُنُواْ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبۡصِرًاۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Alam yaraw annaa ja'alnal laila li yaskunoo feehi wannahaara mubsiraa; inna fee zaalika la Aayaatil liqaw miny-yu'minoon)

क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने रात बनाई ताकि वे उसमें सुकून हासिल करें और दिन को रौशन बनाया [157]? बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं [158]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 86 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 86

"क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने रात बनाई ताकि वे उसमें सुकून हासिल करें और दिन को रौशन बनाया [157]? बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं [158]।"

[157] रात का सुकून और दिन की रौशनी

अल्लाह तआला ने रात को अंधेरी बनाया ताकि इंसान दिन भर की मेहनत के बाद सुकून और आराम पा सके, और दिन को रौशन बनाया ताकि वह अपनी रोज़ी तलाश कर सके और ज़िंदगी के काम अंजाम दे सके। यह हिकमत-ए-इलाहिया का कितना अज़ीम शाहकार है।

[158] अहले ईमान के लिए निशानियाँ

दिन और रात का यह मुनज़्ज़म निज़ाम अल्लाह तआला की वहदानियत और कुदरत की खुली दलील है, मगर इससे वही लोग इबरत व ईमान हासिल करते हैं जो ग़ौर-ओ-फ़िक्र की सलाहियत रखते हैं।

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