Transliteration: (Fa ammal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati fa yuwaffeehim ujoorahum wa yazeeduhum min fadlihee wa ammal lazeenas tankafoo wastakbaroo fa yu'azzibuhum 'azaaban aleema wa laa yajidoona lahum min doonil laahi waliyyanw wa laa naseeraa)
इससे हमें मालूम होता है कि सच्चे मोमिन को सिर्फ़ उसके अमल का पूरा इनाम ही नहीं मिलेगा, बल्कि अल्लाह अपने करम से और भी ज़्यादा अता फरमाएगा।
इन विशेष इनामों में शामिल हैं:
– जन्नत में अल्लाह का दीदार
– अमल से कहीं बढ़कर इनाम
– हमेशा की इज़्ज़त और क़ुबूलियत
यह सब कुछ सिर्फ़ अमल की बुनियाद पर नहीं, बल्कि अल्लाह की बेहिसाब रहमत और करम से अता किया जाएगा।
इस हिस्से में साफ़ किया गया है कि जो लोग तकब्बुर और इंकार में डूबे रहे, उनके लिए सख़्त सज़ा तय है।
ऐसे लोग अख़िरत में बिल्कुल तन्हा और बेसहारा होंगे — न कोई मददगार मिलेगा, न कोई सिफ़ारिश करने वाला।
इसके उलट, अल्लाह ने मोमिनों से मदद और रहमत का वादा किया है।
इनकार करने वालों की यह बेबसी खुद एक शर्मनाक सज़ा है, जो उनकी आख़िरी ज़िल्लत को ज़ाहिर करती है।
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