कुरान - 4:175 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

175
فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَٱعۡتَصَمُواْ بِهِۦ فَسَيُدۡخِلُهُمۡ فِي رَحۡمَةٖ مِّنۡهُ وَفَضۡلٖ وَيَهۡدِيهِمۡ إِلَيۡهِ صِرَٰطٗا مُّسۡتَقِيمٗا

Transliteration: (Fa ammal lazeena aamanoo billaahi wa'tasamoo bihee fasa yudkhiluhum fee rahmatim minhu wa fadlinw wa yahdeehim ilaihi Siraatam Mustaqeema)

तो जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसकी रस्सी को मज़बूती से थामे रहे [495], वह उन्हें अपनी रहमत और फज़ल में दाख़िल करेगा और उन्हें सीधी राह की तरफ़ खुद ही हिदायत देगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 175 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 175 की तफ़्सीर

 

✅ [495] "अल्लाह की रस्सी को थामना" — ज़ाहिर दलील से मुराद

"उसकी रस्सी को थामना" में जो "उसकी" है, वह पिछले आयत में ज़िक्र हुई ज़ाहिर दलील, यानी रसूलुल्लाह ﷺ की तरफ़ इशारा है।
इससे हमें यह सीख मिलती है कि:
"अल्लाह की रस्सी" से मुराद रसूलुल्लाह ﷺ हैं, जो अल्लाह और मख़लूक़ के दरमियान का ज़रिया हैं।

जिस तरह कुएं में गिरा हुआ इंसान रस्सी से ऊपर खींचा जाता है, उसी तरह रसूलुल्लाह ﷺ से मज़बूती से जुड़ने वाला इंसान गुमराही से निकलकर हिदायत तक पहुँचता है।
यही वजह है कि अल्लाह ने फ़रमाया:
"और सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थामे रहो।" (सूरा आल-इमरान, 3:103)
इस आयत से साफ़ साबित होता है कि रसूलुल्लाह ﷺ ही उम्मत के लिए अल्लाह तक पहुंचने का ज़रिया और हिदायत का सरचश्मा हैं।

✅ रसूलुल्लाह ﷺ का दोहरा रिश्ता

रस्सी की मिसाल यह बताती है कि:
– एक सिरा अल्लाह के पास है,
– और दूसरा सिरा रसूलुल्लाह ﷺ के ज़रिये इंसानों तक पहुँचाया गया है।
इसलिए जो लोग रसूलुल्लाह ﷺ की तालीमात, मोहब्बत और इत्तिबा को थामे रहते हैं, वही सच्ची हिदायत पर होते हैं।

✅ तीन वादे जो अल्लाह ने फ़रमाए

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाते हैं और रसूलुल्लाह ﷺ से मज़बूती से जुड़े रहते हैं, उन्हें अल्लाह तआला तीन इनाम अता करेगा:

  1. रहमत (रहमत) — जो दुनिया और आख़िरत दोनों में आम फ़ज़ीलत है।
  2. फ़ज़्ल (बख़्शिश) — जो इंसान के आमाल से कहीं बढ़कर अल्लाह की ख़ास इनायत है।
  3. हिदायत (सीधी राह की तरफ़ रहनुमाई) — अल्लाह की तरफ़ से सीधी राह पर सीधा और ख़ास हिदायत।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now