Transliteration: (Wa iny-yakul lahumul haqqu yaatooo ilaihi muz'ineen)
"और अगर हक़ उन्हीं की तरफ़ हो, तो वे उनकी तरफ़ बड़े आजिज़ व फ़रमांबरदार होकर चले आते हैं!"
मुनाफ़िक़ों की ख़ुदग़र्ज़ी का यह हाल था कि अगर मुक़द्दमे में हक़ उनकी तरफ़ होता और उन्हें मालूम होता कि रसूलुल्लाह ﷺ उनके हक़ में फ़ैसला फ़रमाएंगे, तो वे बड़े फ़रमांबरदार बनकर हुज़ूर ﷺ की बारगाह में दौड़े चले आते थे। यह उनके निफ़ाक़ और मतलब-परस्ती का खुला सबूत था।
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