कुरान - 24:49 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
وَإِن يَكُن لَّهُمُ ٱلۡحَقُّ يَأۡتُوٓاْ إِلَيۡهِ مُذۡعِنِينَ

Transliteration: (Wa iny-yakul lahumul haqqu yaatooo ilaihi muz'ineen)

और अगर हक़ उन्हीं की तरफ़ हो, तो वे उनकी तरफ़ बड़े आजिज़ व फ़रमांबरदार होकर चले आते हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 49

"और अगर हक़ उन्हीं की तरफ़ हो, तो वे उनकी तरफ़ बड़े आजिज़ व फ़रमांबरदार होकर चले आते हैं!"

मुनाफ़िक़ों की ख़ुदग़र्ज़ी का यह हाल था कि अगर मुक़द्दमे में हक़ उनकी तरफ़ होता और उन्हें मालूम होता कि रसूलुल्लाह ﷺ उनके हक़ में फ़ैसला फ़रमाएंगे, तो वे बड़े फ़रमांबरदार बनकर हुज़ूर ﷺ की बारगाह में दौड़े चले आते थे। यह उनके निफ़ाक़ और मतलब-परस्ती का खुला सबूत था।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now