कुरान - 24:5 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُواْ مِنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ وَأَصۡلَحُواْ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Illal lazeena taaboo mim ba'di zaalika wa aslahoo fa innal laaha Ghafoorur Raheem)

सिवाय उन लोगों के जो इसके बाद तौबा कर लें और अपनी इस्लाह कर लें, तो बेशक अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है [13]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 5

"सिवाय उन लोगों के जो इसके बाद तौबा कर लें और अपनी इस्लाह कर लें, तो बेशक अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है [13]।"

[13] सच्ची तौबा से मग़फ़िरत और इज़्ज़त की बहाली

अगर तोहमत लगाने वाला अपनी ग़लती पर शर्मिंदा होकर सच्ची तौबा कर ले और अपनी अमली इस्लाह कर ले, तो अल्लाह तआला आख़िरत के अज़ाब से उसे बख़्श देता है।

अलबत्ता शरीअत की दुनियावी सज़ा (अस्सी कोड़े) नाफ़िज़ होने के बाद, हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ उसकी गवाही की नामक़बूलियत बरक़रार रहती है ताकि आइंदा कोई ऐसी जुर्रत न करे, लेकिन अल्लाह के यहाँ वह फ़िसक़ से बरी हो जाता है।

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