Transliteration: (Wallazeena yarmoonal muhsanaati summa lam yaatoo bi-arba'ati shuhadaaa'a fajlidoohum samaaneena jaldatanw wa laa taqbaloo lahum shahaadatan abadaa; wa ulaaa'ika humul faasiqoon)
"और जो लोग पाकदामन औरतों पर तोहमत लगाएं फिर चार गवाह न लाएं, तो उन्हें अस्सी कोड़े मारो [11] और उनकी गवाही कभी क़बूल न करो; और वही लोग फ़ासिक़ हैं [12]।"
इस्लामी शरीअत में किसी पाकदामन औरत पर ज़िना की तोहमत लगाना बहुत बड़ा जुर्म है। अगर तोहमत लगाने वाला अपने दावे पर चार आदिल (सच्चे) गवाह पेश न कर सके, तो उस पर तीन सज़ाएं लागू होंगी:
उसे अस्सी कोड़े मारे जाएं,
उसकी गवाही हमेशा के लिए रद्द कर दी जाए, और
उसे मुआशरे में फ़ासिक़ (नाफ़रमान व ग़ैर-मोतबर) क़रार दिया जाए।
यह सख़्त क़ानून इसलिए बनाया गया ताकि किसी की इज़्ज़त, आबरू और किरदार को दाग़दार करने की जुर्रत कोई न कर सके। मुआशरे में अफ़वाह तराशी और बदगुमानी को रोकना इस क़ानून का अस्ल मक़सद है।
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