कुरान - 24:4 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
وَٱلَّذِينَ يَرۡمُونَ ٱلۡمُحۡصَنَٰتِ ثُمَّ لَمۡ يَأۡتُواْ بِأَرۡبَعَةِ شُهَدَآءَ فَٱجۡلِدُوهُمۡ ثَمَٰنِينَ جَلۡدَةٗ وَلَا تَقۡبَلُواْ لَهُمۡ شَهَٰدَةً أَبَدٗاۚ وَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡفَٰسِقُونَ

Transliteration: (Wallazeena yarmoonal muhsanaati summa lam yaatoo bi-arba'ati shuhadaaa'a fajlidoohum samaaneena jaldatanw wa laa taqbaloo lahum shahaadatan abadaa; wa ulaaa'ika humul faasiqoon)

और जो लोग पाकदामन औरतों पर (बदकारी की) तोहमत लगाएं फिर चार गवाह पेश न कर सकें, तो उन्हें अस्सी कोड़े मारो [11] और उनकी गवाही कभी क़बूल न करो; और वही लोग फ़ासिक़ (नाफ़रमान) हैं [12]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 4

"और जो लोग पाकदामन औरतों पर तोहमत लगाएं फिर चार गवाह न लाएं, तो उन्हें अस्सी कोड़े मारो [11] और उनकी गवाही कभी क़बूल न करो; और वही लोग फ़ासिक़ हैं [12]।"

[11] तोहमत (हद्दे क़ज़फ़) की शरई सज़ा

इस्लामी शरीअत में किसी पाकदामन औरत पर ज़िना की तोहमत लगाना बहुत बड़ा जुर्म है। अगर तोहमत लगाने वाला अपने दावे पर चार आदिल (सच्चे) गवाह पेश न कर सके, तो उस पर तीन सज़ाएं लागू होंगी:

  • उसे अस्सी कोड़े मारे जाएं,

  • उसकी गवाही हमेशा के लिए रद्द कर दी जाए, और

  • उसे मुआशरे में फ़ासिक़ (नाफ़रमान व ग़ैर-मोतबर) क़रार दिया जाए।

[12] झूठी तोहमत की संगीनी और फ़िसक़

यह सख़्त क़ानून इसलिए बनाया गया ताकि किसी की इज़्ज़त, आबरू और किरदार को दाग़दार करने की जुर्रत कोई न कर सके। मुआशरे में अफ़वाह तराशी और बदगुमानी को रोकना इस क़ानून का अस्ल मक़सद है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now