Transliteration: (Wallazeena yarmoona azwaajahum wa lam yakul lahum shuhadaaa'u illaaa anfusuhum fashahaadatu ahadihim arba'u shahaadaatim billaahi innahoo laminas saadiqeen)
"और जो लोग अपनी बीवियों पर तोहमत लगाएं [14] और उनके पास अपने सिवा कोई गवाह न हों, तो उनमें से एक की गवाही यह होगी कि वह चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही दे [15] कि वह सच्चों में से है।"
यह आयत उस ख़ास सूरत-ए-हाल से मुताल्लिक़ है जब कोई शौहर अपनी बीवी पर बदकारी का इल्ज़ाम लगाए या बच्चे के अपने होने का इन्कार करे, और उसके पास चार गवाह न हों। चूंकि शौहर अपनी बीवी की ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं कर सकता और चार गवाह लाना मुहाल होता है, इसलिए शरीअत ने लिआन (क़समों का मुबादला) का ख़ास ज़ाब्ता मुक़र्रर फ़रमाया।
अदालत में शौहर चार मर्तबा अल्लाह की अज़ीम क़सम खाकर गवाही देगा कि वह अपने इस इल्ज़ाम में बिल्कुल सच्चा है। यह क़समें चार गवाहों के क़ाइम-मक़ाम ठहराई गई हैं।
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