कुरान - 24:6 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَٱلَّذِينَ يَرۡمُونَ أَزۡوَٰجَهُمۡ وَلَمۡ يَكُن لَّهُمۡ شُهَدَآءُ إِلَّآ أَنفُسُهُمۡ فَشَهَٰدَةُ أَحَدِهِمۡ أَرۡبَعُ شَهَٰدَٰتِۭ بِٱللَّهِ إِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

Transliteration: (Wallazeena yarmoona azwaajahum wa lam yakul lahum shuhadaaa'u illaaa anfusuhum fashahaadatu ahadihim arba'u shahaadaatim billaahi innahoo laminas saadiqeen)

और जो लोग अपनी बीवियों पर तोहमत लगाएं [14] और उनके पास अपने सिवा कोई गवाह न हों, तो उनमें से एक की गवाही यह होगी कि वह चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही दे [15] कि वह यक़ीनन सच्चों में से है; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 6

"और जो लोग अपनी बीवियों पर तोहमत लगाएं [14] और उनके पास अपने सिवा कोई गवाह न हों, तो उनमें से एक की गवाही यह होगी कि वह चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही दे [15] कि वह सच्चों में से है।"

[14] शौहर की तरफ़ से बीवी पर तोहमत

यह आयत उस ख़ास सूरत-ए-हाल से मुताल्लिक़ है जब कोई शौहर अपनी बीवी पर बदकारी का इल्ज़ाम लगाए या बच्चे के अपने होने का इन्कार करे, और उसके पास चार गवाह न हों। चूंकि शौहर अपनी बीवी की ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं कर सकता और चार गवाह लाना मुहाल होता है, इसलिए शरीअत ने लिआन (क़समों का मुबादला) का ख़ास ज़ाब्ता मुक़र्रर फ़रमाया।

[15] चार क़समों के ज़रिए गवाही (लिआन)

अदालत में शौहर चार मर्तबा अल्लाह की अज़ीम क़सम खाकर गवाही देगा कि वह अपने इस इल्ज़ाम में बिल्कुल सच्चा है। यह क़समें चार गवाहों के क़ाइम-मक़ाम ठहराई गई हैं।

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