कुरान - 24:3 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
ٱلزَّانِي لَا يَنكِحُ إِلَّا زَانِيَةً أَوۡ مُشۡرِكَةٗ وَٱلزَّانِيَةُ لَا يَنكِحُهَآ إِلَّا زَانٍ أَوۡ مُشۡرِكٞۚ وَحُرِّمَ ذَٰلِكَ عَلَى ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Azzaanee laa yankihu illaa zaaniyatan aw mushrikatanw wazzaaniyatu laa yankihuhaaa illaa zaanin aw mushrik; wa hurrima zaalika 'alal mu'mineen)

ज़िना करने वाला मर्द निकाह नहीं करता मगर किसी ज़िना करने वाली या मुशरिक औरत ही से [9], और ज़िना करने वाली औरत से निकाह नहीं करता मगर कोई ज़िना करने वाला या मुशरिक मर्द ही; और यह (बदकारों से निकाह करना) मोमिनों पर हराम कर दिया गया है [10]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 3

"ज़िना करने वाला मर्द निकाह नहीं करता मगर किसी ज़िना करने वाली या मुशरिक औरत ही से [9], और ज़िना करने वाली औरत से निकाह नहीं करता मगर कोई ज़िना करने वाला या मुशरिक मर्द ही; और यह मोमिनों पर हराम कर दिया गया है [10]।"

[9] तन्सीख़ और निकाह के अहकाम

इस आयत के हुक्म में दो एतबार से नस्क़ (तब्दीली) वाक़े हुई:

  • इब्तिदा-ए-इस्लाम में ज़ानिया औरत से निकाह हराम था, लेकिन बाद में सूरह अन-नूर की आयत 32 ('और अपने बे-निकाहों के निकाह कर दो') ने इसे मन्सूर फ़रमा दिया, बशर्ते कि वह तौबा कर ले।

  • दूसरे यह कि मुशरिकों से निकाह सूरह बक़रह की आयत 221 ('और शिर्क करने वाली औरतों से निकाह न करो जब तक ईमान न लाएं') के ज़रिए मुतलक़न हराम ठहरा दिया गया।

[10] शाने नुज़ूल और बदकारी से परहेज़

यह आयत उस वक़्त नाज़िल हुई जब बाज़ ग़रीब मुहाजिरीन ने मक्के की बाज़ मालदार बदकार औरतों से निकाह का इरादा किया ताकि उनकी मालदारी से फ़ायदा उठाएं और शायद उनकी इस्लाह हो सके। अल्लाह तआला ने मोमिनों को ऐसी बदचलनों से निकाह करने से रोक दिया और फ़रमाया कि दीनी व अख़लाक़ी पाकीज़गी ही निकाह की अस्ल बुनियाद है।

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