कुरान - 24:9 सूरह अन-नूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
وَٱلۡخَٰمِسَةَ أَنَّ غَضَبَ ٱللَّهِ عَلَيۡهَآ إِن كَانَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

Transliteration: (Wal khaamisata anna ghadabal laahi 'alaihaaa in kaana minas saadiqeen)

और पांचवीं बार यह कहे कि उस पर अल्लाह का ग़ज़ब [18] नाज़िल हो अगर वह (शौहर) सच्चों में से हो [19]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नूर आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नूर – आयत 9

"और पांचवीं बार यह कहे कि उस पर अल्लाह का ग़ज़ब [18] नाज़िल हो अगर वह सच्चों में से हो [19]!"

[18] लिआन में लानत व ग़ज़ब की ख़ास इजाज़त

आम तौर पर किसी मुसलमान पर नाम लेकर लानत भेजना या ग़ज़ब की बद्दुआ करना हराम है, लेकिन लिआन की इस ख़ास क़ानूनी कार्रवाई में शरीअत ने इसकी इजाज़त दी है ताकि हक़ और बातिल का फ़ैसला अल्लाह के सुपुर्द हो जाए।

[19] लिआन का शरई निज़ाम और अहकाम

जब दोनों तरफ़ से पाँच-पाँच क़समें पूरी हो जाएं, तो क़ाज़ी दोनों के दरमियान हमेशा के लिए तफ़रीक़ (जुदाई) करा देगा। दोनों का निकाह हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा। अगर शौहर क़सम खाने से इन्कार करे तो उसे क़ैद रखा जाएगा जब तक कि वह क़सम न खाए या अपने झूठ का इक़रार न करे (और झूठ मानने पर उस पर तोहमत की हद्द अस्सी कोड़े लगेगी)।

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