Transliteration: (Wal khaamisata anna ghadabal laahi 'alaihaaa in kaana minas saadiqeen)
"और पांचवीं बार यह कहे कि उस पर अल्लाह का ग़ज़ब [18] नाज़िल हो अगर वह सच्चों में से हो [19]!"
आम तौर पर किसी मुसलमान पर नाम लेकर लानत भेजना या ग़ज़ब की बद्दुआ करना हराम है, लेकिन लिआन की इस ख़ास क़ानूनी कार्रवाई में शरीअत ने इसकी इजाज़त दी है ताकि हक़ और बातिल का फ़ैसला अल्लाह के सुपुर्द हो जाए।
जब दोनों तरफ़ से पाँच-पाँच क़समें पूरी हो जाएं, तो क़ाज़ी दोनों के दरमियान हमेशा के लिए तफ़रीक़ (जुदाई) करा देगा। दोनों का निकाह हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा। अगर शौहर क़सम खाने से इन्कार करे तो उसे क़ैद रखा जाएगा जब तक कि वह क़सम न खाए या अपने झूठ का इक़रार न करे (और झूठ मानने पर उस पर तोहमत की हद्द अस्सी कोड़े लगेगी)।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat