कुरान - 13:14 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
لَهُۥ دَعۡوَةُ ٱلۡحَقِّۚ وَٱلَّذِينَ يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسۡتَجِيبُونَ لَهُم بِشَيۡءٍ إِلَّا كَبَٰسِطِ كَفَّيۡهِ إِلَى ٱلۡمَآءِ لِيَبۡلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَٰلِغِهِۦۚ وَمَا دُعَآءُ ٱلۡكَٰفِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَٰلٖ

Transliteration: (Lahoo da'watul haqq; wallazeena yad'oona min doonihee laa yastajeeboona lahum bishai'in illaa kabaasiti kaffaihi ilal maaa'i liyablugha faahu wa maa huwa bibaalighih; wa maa du'aaa'ul kaafireena illaa fee dalaal)

सच्ची पुकार केवल उसी के लिए है; और उसके सिवा जिन्हें वे पुकारते हैं, वे उनकी किसी बात का कोई उत्तर नहीं दे सकते। उनकी मिसाल उस व्यक्ति जैसी है जो पानी की ओर अपनी दोनों हथेलियां फैलाए हुए हो ताकि पानी उसके मुंह तक पहुंच जाए, जबकि वह उस तक कभी पहुंचने वाला नहीं। और काफ़िरों की पुकार (दुआ) केवल भटकाव और व्यर्थता में है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 14 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] ग़ैर-अल्लाह की बेबसी की शानदार मिसाल

अल्लाह के सिवा झूठे माबूदों और मूर्तियों को पुकारने वाला उस प्यासे की तरह है जो दूर खड़े होकर पानी की तरफ़ हाथ फैलाए और सोचे कि पानी अपने आप उसके मुंह में आ जाएगा। झूठे पूज्य न सुनते हैं, न मदद कर सकते हैं; उनकी पूजा और उनसे मांगना बिल्कुल निष्फल और व्यर्थ है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now