कुरान - 13:15 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
۩ وَلِلَّهِۤ يَسۡجُدُۤ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ طَوۡعٗا وَكَرۡهٗا وَظِلَٰلُهُم بِٱلۡغُدُوِّ وَٱلۡأٓصَالِ

Transliteration: (Wa lillaahi yasjudu man fis samaawaati wal ardi taw 'anw wa karhanw wa zilaaluhum bilghuduwwi wal aasaal (make sajda))

और आकाशों और धरती में जो कोई भी है, सब स्वेच्छा से या विवश होकर अल्लाह ही को सजदा करते हैं, और उनकी परछाइयां भी सुबह और शाम (उसी के आगे झुकती हैं)। [सजदा] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 15 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] कायनात का सजदा-ए-ताअत और परछाइयों का झुकना

कायनात की हर चीज़ अल्लाह के क़ानून के आगे सिर झुकाए हुए है। ईमान वाले दिल की ख़ुशी से सजदा करते हैं और काफ़िर अपनी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ भी अल्लाह के शारीरिक व प्राकृतिक नियमों के अधीन हैं। सुबह और शाम ढलती परछाइयां भी अल्लाह की इताअत का इज़हार करती हैं।

✅ [2] आयत-ए-सजदा

यह क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत के सजदों में से एक है, जिसे पढ़ने और सुनने वाले पर सजदा-ए-तिलावत करना सुन्नत/वाजिब है।

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