Transliteration: (Wa lillaahi yasjudu man fis samaawaati wal ardi taw 'anw wa karhanw wa zilaaluhum bilghuduwwi wal aasaal (make sajda))
कायनात की हर चीज़ अल्लाह के क़ानून के आगे सिर झुकाए हुए है। ईमान वाले दिल की ख़ुशी से सजदा करते हैं और काफ़िर अपनी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ भी अल्लाह के शारीरिक व प्राकृतिक नियमों के अधीन हैं। सुबह और शाम ढलती परछाइयां भी अल्लाह की इताअत का इज़हार करती हैं।
यह क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत के सजदों में से एक है, जिसे पढ़ने और सुनने वाले पर सजदा-ए-तिलावत करना सुन्नत/वाजिब है।
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