कुरान - 13:19 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
۞أَفَمَن يَعۡلَمُ أَنَّمَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَ ٱلۡحَقُّ كَمَنۡ هُوَ أَعۡمَىٰٓۚ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ

Transliteration: (Afamai ya'lamu annamaaa unzila ilaika mir Rabbikal haqqu kaman huwa a'maa; innamaa yatazakkaru ulul albaab)

तो क्या वह व्यक्ति जो यह जानता है कि जो कुछ आपके रब की ओर से आप पर नाज़िल हुआ है वह सत्य है, उस व्यक्ति जैसा हो सकता है जो अंधा है? नसीहत तो केवल वही स्वीकार करते हैं जो बुद्धिमान हैं— (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 19 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] ज्ञानवान और अंधे की तुलना

जो क़ुरआन को अल्लाह का सच्चा कलाम पहचानता है और उस पर अमल करता है, वह आंखों वाला और प्रबुद्ध है; जबकि जो हक़ को देखकर भी मुंह मोड़ लेता है, वह रूहानी तौर पर अंधा है। सच्ची समझ केवल अक़्ल वालों को नसीब होती है।

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