कुरान - 13:21 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَٱلَّذِينَ يَصِلُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُوٓءَ ٱلْحِسَابِ

Transliteration: (Wallazeena yasiloona maaa amaral laahu bihee ai yoosala wa yakhshawna Rabbahum wa yakhaafoona sooo'al hisaab)

और जो लोग उन संबंधों को जोड़ते हैं जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है, और अपने रब से डरते हैं, और बुरे हिसाब से भयभीत रहते हैं; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 21 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] सिला-ए-रहमी (संबंधों को जोड़ना)

मोमिन अपने माता-पिता, रिश्तेदारों, पड़ोसियों और मुस्लिम उम्मत के साथ रिश्तों को मज़बूत रखते हैं और क़ता-ए-रहमी (रिश्ते तोड़ने) से बचते हैं।

✅ [2] रब का ख़ौफ़ और बुरे हिसाब का डर

वे अल्लाह की नाफ़रमानी से डरते हैं और क़यामत के उस बारीक हिसाब से कांपते हैं जहाँ ज़रा-सा भी ज़ुल्म पकड़ा जाएगा।

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