कुरान - 13:18 सूरह अर-राँद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
لِلَّذِينَ ٱسۡتَجَابُواْ لِرَبِّهِمُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ وَٱلَّذِينَ لَمۡ يَسۡتَجِيبُواْ لَهُۥ لَوۡ أَنَّ لَهُم مَّا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا وَمِثۡلَهُۥ مَعَهُۥ لَٱفۡتَدَوۡاْ بِهِۦٓۚ أُوْلَـٰٓئِكَ لَهُمۡ سُوٓءُ ٱلۡحِسَابِ وَمَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمِهَادُ

Transliteration: (Lillazeenas tajaaboo lirabbihimul husnaa; wallazeena lam yastajeeboo lahoo law anna lahum maa fil ardi jamee'anw wa mislahoo ma'ahoo laftadaw bih; ulaaa'ika lahum sooo'ul hisaab; wa ma'waahum Jahannamu wa bi'sal mihaad)

जिन लोगों ने अपने रब के बुलावे को स्वीकार किया, उनके लिए भलाई (उत्तम प्रतिफल/जन्नत) है। और जिन लोगों ने उसका बुलावा स्वीकार न किया, यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में है और उसके साथ उतना ही और भी हो, तो वे (सज़ा से बचने के लिए) उसे फ़िदिये (अर्थदंड) में दे डालने को तैयार हो जाएं। यही वे लोग हैं जिनका हिसाब बहुत कठोर होगा, और उनका ठिकाना जहन्नम है; और वह बहुत बुरा विश्राम-स्थल है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-राँद आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अर्-रअद – आयत 18 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] ईमान वालों का उत्तम प्रतिफल (हुस्ना)

जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल की दावत पर लब्बैक कहा, उनके लिए दुनिया में शांति और आख़िरत में जन्नत की अनन्त नेमतें हैं।

✅ [2] काफ़िरों का भयानक हिसाब और दोज़ख़

दोज़ख़ के अज़ाब को देखकर काफ़िर सोचेंगे कि काश पूरी दुनिया की दौलत देकर अपनी जान छुड़ा सकें, मगर वहाँ कोई फ़िदिया क़ुबूल नहीं होगा।

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