कुरान - 30:11 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
ٱللَّهُ يَبۡدَؤُاْ ٱلۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ ثُمَّ إِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ

Transliteration: (Allaahu yabda'ul khalqa summa yu'eeduhoo summa ilaihi turja'oon)

अल्लाह ही पैदाइश की इब्तिदा करता है, फिर उसका इआदा करेगा (दोबारा पैदा करेगा) [21], फिर उसी की तरफ़ तुम सब पलटाए जाओगे [22]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 11

"अल्लाह ही पैदाइश की इब्तिदा करता है, फिर उसका इआदा करेगा (दोबारा पैदा करेगा) [21], फिर उसी की तरफ़ तुम सब पलटाए जाओगे [22]।"

[21] दोबारा पैदा करने की क़ुदरत

जिस ज़ात ने इंसान को पहली बार ख़ाली अदम (नाबूद) से पैदा किया, उसके लिए दोबारा ज़िंदा करना पहली बार से भी ज़्यादा आसान है। अक़्ल का तक़ाज़ा है कि पहली पैदाइश को मानने वाला दोबारा ज़िंदा होने का इंकार न करे।

[22] अल्लाह की तरफ़ वापसी

हर इंसान को बिल-आख़िर अपने ख़ालिक़ की तरफ़ लौटना है। मौलाना रूम फ़रमाते हैं कि दोस्त अपने दोस्त की तरफ़ ख़ुशी-ख़ुशी जाता है; मोमिन मौत और दीदार-ए-इलाही का मुश्ताक़ होता है, जबकि काफ़िर ख़ौफ़ और हसरत के साथ जबरन घसीटा जाता है।

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