कुरान - 30:12 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
وَيَوۡمَ تَقُومُ ٱلسَّاعَةُ يُبۡلِسُ ٱلۡمُجۡرِمُونَ

Transliteration: (Wa yawma taqoomus Saa'atu yublisul mujrimoon)

और जिस दिन क़यामत क़ायम होगी, मुजरिम लोग बिल्कुल मायूस (हैरान व लाचार) रह जाएंगे [23]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 12

"और जिस दिन क़यामत क़ायम होगी, मुजरिम लोग बिल्कुल मायूस (हैरान व लाचार) रह जाएंगे [23]।"

[23] मुजरिमों की मायूसी और अहले ईमान की उम्मीद

क़यामत के दिन जब हक़ीक़त सामने आ जाएगी तो काफ़िर और मुजरिम हर तरफ़ से मायूस हो जाएंगे क्योंकि उनके बुत और झूठे माबूद बे-बस साबित होंगे। इसके बरअक्स अहले ईमान उस हौलनाक दिन भी अल्लाह की रहमत और हुज़ूर शफ़ीउल-मुज़निबीन ﷺ की शफ़ाअत की उम्मीद से पुर-अम्न होंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now