कुरान - 30:13 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَلَمۡ يَكُن لَّهُم مِّن شُرَكَآئِهِمۡ شُفَعَـٰٓؤُاْ وَكَانُواْ بِشُرَكَآئِهِمۡ كَٰفِرِينَ

Transliteration: (Wa lam yakul lahum min shurakaaa'ihim shufa'aaa'u wa kaanoo bishurakaaa'ihim kaafireen)

और उनके (बनाए हुए) शरीकों में से कोई उनका सिफ़ारशी न होगा [24], और वे ख़ुद अपने शरीकों के मुनकिर हो जाएंगे [25]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 13

"और उनके (बनाए हुए) शरीकों में से कोई उनका सिफ़ारशी न होगा [24], और वे ख़ुद अपने शरीकों के मुनकिर हो जाएंगे [25]।"

[24] बातिल माबूदों की बे-बसी

मुशरिकीन जिन बुतों और मख़लूक़ को ख़ुदा का शरीक समझकर पूजते थे कि वे अल्लाह के यहाँ उनकी सिफ़ारिश करेंगे, वे उस दिन किसी काम न आएंगे। सिफ़ारिश (शफ़ाअत) का हक़ सिर्फ़ अल्लाह के मुक़र्रब बंदों (अम्बिया व औलिया) को अल्लाह के इज़्न से हासिल होगा, पत्थरों और बुतों को नहीं।

[25] शरीकों से बेज़ारी

क़यामत के दिन मुशरिकीन ख़ुद अपने बुतों पर लानत भेजेंगे और उनकी पूजा का इंकार करेंगे, और वे बुत भी अपने पुजारियों से बेज़ारी का इज़हार करेंगे।

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