Transliteration: (Wa lam yakul lahum min shurakaaa'ihim shufa'aaa'u wa kaanoo bishurakaaa'ihim kaafireen)
"और उनके (बनाए हुए) शरीकों में से कोई उनका सिफ़ारशी न होगा [24], और वे ख़ुद अपने शरीकों के मुनकिर हो जाएंगे [25]।"
मुशरिकीन जिन बुतों और मख़लूक़ को ख़ुदा का शरीक समझकर पूजते थे कि वे अल्लाह के यहाँ उनकी सिफ़ारिश करेंगे, वे उस दिन किसी काम न आएंगे। सिफ़ारिश (शफ़ाअत) का हक़ सिर्फ़ अल्लाह के मुक़र्रब बंदों (अम्बिया व औलिया) को अल्लाह के इज़्न से हासिल होगा, पत्थरों और बुतों को नहीं।
क़यामत के दिन मुशरिकीन ख़ुद अपने बुतों पर लानत भेजेंगे और उनकी पूजा का इंकार करेंगे, और वे बुत भी अपने पुजारियों से बेज़ारी का इज़हार करेंगे।
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