कुरान - 30:14 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
وَيَوۡمَ تَقُومُ ٱلسَّاعَةُ يَوۡمَئِذٖ يَتَفَرَّقُونَ

Transliteration: (Wa Yawma taqoomus Saa'atu Yawma'iziny yatafarraqoon)

और जिस दिन क़यामत क़ायम होगी, उस दिन सब लोग अलग-अलग (गिरोहों में) बंट जाएंगे [26]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 14

"और जिस दिन क़यामत क़ायम होगी, उस दिन सब लोग अलग-अलग (गिरोहों में) बंट जाएंगे [26]।"

[26] हक़ और बातिल की दायमी जुदाई

दुनिया में मोमिन और काफ़िर एक साथ रहते, खाते-पीते और कारोबार करते हैं, मगर क़यामत के दिन फ़ैसलाकुन जुदाई होगी: अहले ईमान जन्नत की तरफ़ इज़्ज़त के साथ जाएंगे और काफ़िरों को ज़िल्लत के साथ जहन्नुम की तरफ़ हांका जाएगा (वमताज़ुल-यौमा अय्युहल-मुजरिमून)।

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