कुरान - 30:10 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
ثُمَّ كَانَ عَٰقِبَةَ ٱلَّذِينَ أَسَـٰٓـُٔواْ ٱلسُّوٓأَىٰٓ أَن كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ وَكَانُواْ بِهَا يَسۡتَهۡزِءُونَ

Transliteration: (Summa kaana'aaqibatal lazeena asaaa'us sooo aaa an kazzaboo bi aayaatil laahi wa kaanoo bihaa yastahzi'oon (section 1))

फिर बुराई करने वालों का अंजाम बदतरीन हुआ, इस वजह से कि उन्होंने अल्लाह की आयात को झुठलाया और उनका मज़ाक़ उड़ाते रहे [20]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 10

"फिर बुराई करने वालों का अंजाम बदतरीन हुआ, इस वजह से कि उन्होंने अल्लाह की आयात को झुठलाया और उनका मज़ाक़ उड़ाते रहे [20]।"

[20] मुसलसल गुनाह और दिल की सख्ती

हज़रत मुफ़्ती साहिब फ़रमाते हैं कि जब इंसान लगातार गुनाह करता रहता है और तौबा नहीं करता, तो आहिस्ता-आहिस्ता उसका दिल सियाह हो जाता है। यहाँ तक कि वह पहले सुन्नतों को छोड़ता है, फिर फ़राइज़ से ग़ाफ़िल होता है, और बिल-आख़िर अल्लाह की आयात का मज़ाक़ उड़ाने और कुफ़्र तक पहुँच जाता है। गुनाहों का बदतरीन अंजाम ईमान से महरूमी है।

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