कुरान - 30:9 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
أَوَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ كَانُوٓاْ أَشَدَّ مِنۡهُمۡ قُوَّةٗ وَأَثَارُواْ ٱلۡأَرۡضَ وَعَمَرُوهَآ أَكۡثَرَ مِمَّا عَمَرُوهَا وَجَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِۖ فَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيَظۡلِمَهُمۡ وَلَٰكِن كَانُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ يَظۡلِمُونَ

Transliteration: (Awalam yaseeroo fil ardi fa-yanzuroo kaifa kaana 'aaqibatul lazeena min qablihim; kaanooo ashadda minhhum quwwatanw wa asaarul arda wa 'amaroohaaa aksara mimmaa 'amaroohaa wa jaaa'athum Rusuluhum bil baiyinaati famaa kaanal laahu liyazli mahum wa laakin kaanooo anfusahum yazlimoon)

क्या उन्होंने ज़मीन में सैर नहीं की कि देखते कि उन लोगों का कैसा अंजाम हुआ [15] जो उनसे पहले थे? वे ताक़त में इनसे कहीं ज़्यादा सख़्त थे [16], और उन्होंने ज़मीन को जोता (खोदा) था और उसे इनसे ज़्यादा आबाद किया था [17], और उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ लेकर आए थे [18]; तो अल्लाह ऐसा न था कि उन पर ज़ुल्म करता [19], बल्कि वे ख़ुद अपनी जानों पर ज़ुल्म करते रहे थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 9

"क्या उन्होंने ज़मीन में सैर नहीं की कि देखते कि उन लोगों का कैसा अंजाम हुआ [15] जो उनसे पहले थे? वे ताक़त में इनसे कहीं ज़्यादा सख़्त थे [16], और उन्होंने ज़मीन को जोता (खोदा) था और उसे इनसे ज़्यादा आबाद किया था [17], और उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ लेकर आए थे [18]; तो अल्लाह ऐसा न था कि उन पर ज़ुल्म करता [19], बल्कि वे ख़ुद अपनी जानों पर ज़ुल्म करते रहे थे।"

[15] पिछली क़ौमों के अंजाम से इब्रत

सफ़र करने का एक मक़सद यह भी होना चाहिए कि इंसान पिछली हलाक शुदा सरकश क़ौमों के खण्डहरों को देखकर इब्रत हासिल करे कि नाफ़रमानी का अंजाम कितना भयानक होता है।

[16] जिस्मानी ताक़त और वुसअत

क़ौमे आद और समूद जिस्मानी क़द-ओ-क़ामत, ताक़त और लंबी उम्रों में अहले मक्का से कहीं आगे थीं। पहाड़ों को तराश कर महल बनाते थे।

[17] ज़मीन की आबादकारी और हुनरमंदी

उन्होंने ज़मीन में नहरें खोदीं, काश्तकारी की, बाग़ात लगाए और आलीशान शहर बसाए, मगर जब अल्लाह का अज़ाब आया तो उनकी कोई हुनरमंदी और दौलत काम न आई।

[18] रसूलों के वाज़ेह मौजिज़ात

अल्लाह ने हर ज़माने के तक़ाज़े के मुताबिक़ अम्बिया को रौशन मौजिज़ात देकर भेजा ताकि हुज्जत तमाम हो जाए। जब उन्होंने मौजिज़ात देखकर भी झुठलाया तो हलाक कर दिए गए।

[19] ज़ुल्म का सबब ख़ुद उनके आमाल

अल्लाह ने उन पर कोई बेजा ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि उन्होंने नेमतों का ग़लत इस्तेमाल करके और रसूलों की तकज़ीब करके ख़ुद अपनी जानों पर ज़ुल्म ढाया था।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now