कुरान - 30:7 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
يَعۡلَمُونَ ظَٰهِرٗا مِّنَ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَهُمۡ عَنِ ٱلۡأٓخِرَةِ هُمۡ غَٰفِلُونَ

Transliteration: (Ya'lamoona zaahiram minal hayaatid dunya wa hum 'anil Aakhirati hum ghaafiloon)

वे तो बस दुनियावी ज़िंदगी के ज़ाहिरी पहलू को जानते हैं [9], और वे आख़िरत से बिल्कुल बे-ख़बर (ग़ाफ़िल) हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 7

"वे तो बस दुनियावी ज़िंदगी के ज़ाहिरी पहलू को जानते हैं [9], और वे आख़िरत से बिल्कुल बे-ख़बर (ग़ाफ़िल) हैं।"

[9] दुनियावी ज़ाहिर-परस्ती और आख़िरत से ग़फ़लत

मुशरिकीन और दुनियादार लोग सिर्फ़ दुनिया के ज़ाहिरी नफ़ा-नुक़सान, तिजारत और मौजूदा हालात को देखते हैं। वे सोचते हैं कि जो आज ग़ालिब है वह हमेशा ग़ालिब रहेगा और जो आज मग़लूब है वह हमेशा मग़लूब रहेगा। वे यह नहीं जानते कि दुनिया के पीछे एक दायमी जहान है जहाँ हर अमल का हिसाब होना है।

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