कुरान - 30:5 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
بِنَصۡرِ ٱللَّهِۚ يَنصُرُ مَن يَشَآءُۖ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

Transliteration: (Binasril laa; yansuru mai yashaaa'u wa Huwal 'Azeezur Raheem)

अल्लाह की मदद से [7]; वह जिसकी चाहता है मदद फ़रमाता है; और वही ज़बरदस्त (ग़ालिब), निहायत रहम फ़रमाने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 5

"अल्लाह की मदद से [7]; वह जिसकी चाहता है मदद फ़रमाता है; और वही ज़बरदस्त (ग़ालिब), निहायत रहम फ़रमाने वाला है।"

[7] नुसरत-ए-इलाही और शान-ए-रहमत

यह कामयाबी अल्लाह की ग़ैबी इमदाद और नुसरत से हासिल हुई। अल्लाह जिसे चाहता है इज़्ज़त और फतह अता फ़रमाता है। वह अपने दुश्मनों पर ग़ालिब आने वाला ज़बरदस्त बादशाह है और अपने नेक बंदों पर बे-पनाह रहमत फ़रमाने वाला है।

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