कुरान - 30:3 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
فِيٓ أَدۡنَى ٱلۡأَرۡضِ وَهُم مِّنۢ بَعۡدِ غَلَبِهِمۡ سَيَغۡلِبُونَ

Transliteration: (Feee adnal ardi wa hummim ba'di ghalabihim sa-yaghliboon)

क़रीब की सरज़मीन में [2]; लेकिन वे अपनी इस शिकस्त के बाद बहुत जल्द ग़ालिब आ जाएंगे [3]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 3

"क़रीब की सरज़मीन में [2]; लेकिन वे अपनी इस शिकस्त के बाद बहुत जल्द ग़ालिब आ जाएंगे [3];"

[2] शिकस्त का मक़ाम

क़रीब की सरज़मीन से मुराद मुल्क-ए-शाम और जज़ीरा का वह इलाक़ा है जो दजला और फुरात के दरमियान अरब से मुत्तसिल था। इस जंग में फारस के बादशाह परवेज़ बिन हरमुज़ की फ़ौज ने कैसर-ए-रूम (हेराक्लियस) की फ़ौजों को पीछे धकेल दिया था।

[3] रूमियों की दोबारा फतह की पेशीनगोई

अल्लाह तआला ने साफ़ फ़रमा दिया कि यह शिकस्त दायमी नहीं है, बल्कि अपनी इस शिकस्त के बाद रूमी बहुत जल्द दोबारा ग़ालिब आ जाएंगे और ईरानियों को पछाड़ देंगे। यह क़ुरआन मजीद का एक अज़ीम ग़ैबी मौजिज़ा था।

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