कुरान - 30:4 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
فِي بِضۡعِ سِنِينَۗ لِلَّهِ ٱلۡأَمۡرُ مِن قَبۡلُ وَمِنۢ بَعۡدُۚ وَيَوۡمَئِذٖ يَفۡرَحُ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Fee bid'i sineen; lillaahil amru min qablu wa mim ba'd; wa yawma'iziny yafrahul mu'minoon)

चंद ही बरसों में [4]; पहले भी और बाद में भी सारा इख़्तियार अल्लाह ही का है [5]; और उस दिन मोमिन ख़ुशी मनाएंगे [6]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 4

"चंद ही बरसों में [4]; पहले भी और बाद में भी सारा इख़्तियार अल्लाह ही का है [5]; और उस दिन मोमिन ख़ुशी मनाएंगे [6];"

[4] मुद्दत की तअय्युन (बिज़अ सिनीन)

अरबी ज़बान में "बिज़अ" तीन से नौ साल तक की मुद्दत को कहा जाता है। हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु ने मुशरिकीन से शर्त लगाई थी, और ठीक सातवें साल यह पेशीनगोई हरफ़-ब-हरफ़ सच साबित हुई जब कैसर-ए-रूम ने फारसियों पर शानदार फतह हासिल की।

[5] पहले और बाद अल्लाह ही का हुक्म

हार हो या जीत, बुलंदी हो या पस्ती, हर हाल में हुक्म और इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह तआला का है। कोई क़ौम अपनी ताक़त के बल पर नहीं जीतती, बल्कि अल्लाह की तक़दीर और उसकी मशिय्यत ही कारफ़रमा होती है।

[6] मोमिनीन की दोहरी ख़ुशी

जिस दिन रूमियों की फतह की ख़बर मदीना मुनव्वरा पहुँची, उसी दिन ग़ज़वा-ए-बदर में मुसलमानों को मुशरिकीन पर अज़ीम फतह नसीब हुई थी। इस तरह अहले ईमान को दोहरी ख़ुशी हासिल हुई—एक अपनी फतह की और दूसरी क़ुरआनी पेशीनगोई के सच साबित होने की।

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