कुरान - 30:2 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
غُلِبَتِ ٱلرُّومُ

Transliteration: (Ghulibatir Room)

रूमी (रोमन ईसाई) मक़हूर (मग़लूब) हो गए [1]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 2

"रूमी (रोमन ईसाई) मक़हूर (मग़लूब) हो गए [1];"

[1] रूमियों की शिकस्त का तारीखी पसमंज़र

रूमी ईसाई थे यानी अहले किताब, जबकि अहले फारस (ईरानी) पारसी और आतिश-परस्त (आग पूजने वाले) थे। मक्का के मुशरिकीन बुतपरस्त थे, इसलिए वे फारसियों की कामयाबी चाहते थे, जबकि सहाबा-ए-किराम अहले किताब होने की बिना पर रूमियों की फतह के ख़्वाहिशमंद थे। जब फारसियों ने रूमियों को शदीद शिकस्त दी तो मुशरिकीन-ए-मक्का ने मुसलमानों को ताना दिया कि जिस तरह हमारे ईरानी भाइयों ने तुम्हारे ईसाई भाइयों को हराया, उसी तरह हम तुम्हें शिकस्त देंगे। इस पर अल्लाह तआला ने यह पेशीनगोई नाज़िल फ़रमाई कि चंद बरसों में पासा पलट जाएगा और रूमी दोबारा ग़ालिब आ जाएंगे।

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