Transliteration: (Ghulibatir Room)
"रूमी (रोमन ईसाई) मक़हूर (मग़लूब) हो गए [1];"
रूमी ईसाई थे यानी अहले किताब, जबकि अहले फारस (ईरानी) पारसी और आतिश-परस्त (आग पूजने वाले) थे। मक्का के मुशरिकीन बुतपरस्त थे, इसलिए वे फारसियों की कामयाबी चाहते थे, जबकि सहाबा-ए-किराम अहले किताब होने की बिना पर रूमियों की फतह के ख़्वाहिशमंद थे। जब फारसियों ने रूमियों को शदीद शिकस्त दी तो मुशरिकीन-ए-मक्का ने मुसलमानों को ताना दिया कि जिस तरह हमारे ईरानी भाइयों ने तुम्हारे ईसाई भाइयों को हराया, उसी तरह हम तुम्हें शिकस्त देंगे। इस पर अल्लाह तआला ने यह पेशीनगोई नाज़िल फ़रमाई कि चंद बरसों में पासा पलट जाएगा और रूमी दोबारा ग़ालिब आ जाएंगे।
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