कुरान - 30:6 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَعۡدَ ٱللَّهِۖ لَا يُخۡلِفُ ٱللَّهُ وَعۡدَهُۥ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa'dal laahi laa yukhliful laahu wa'dahoo wa laakin na aksaran naasi laa ya'lamoon)

(यह) अल्लाह का वादा है; अल्लाह अपने वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता, लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [8]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 6

"(यह) अल्लाह का वादा है; अल्लाह अपने वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता, लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [8]।"

[8] वादे की सच्चाई और इंसानी बे-ख़बरी

अल्लाह तआला का वादा सच्चा और अटल है, वह कभी अपने वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता। उबई बिन ख़लफ़ जैसे मुशरिकीन इस पेशीनगोई का मज़ाक़ उड़ाते थे और कहते थे कि रूमी कभी नहीं जीत सकते, मगर अल्लाह का वादा पूरा होकर रहा। अक्सर लोग अल्लाह की क़ुदरत और उसकी हिकमतों से बे-ख़बर रहते हैं।

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